B2B ईकॉमर्स और B2C के बीच सबसे बड़ा अंतर है खरीदार का स्वरूप (बायर पर्सोना)। जब आपके सामने प्रोडक्ट खरीदने वाला कोई बिज़नेस या रिटेलर हो, तो खेल पूरी तरह बदल जाता है। वे खरीद के निर्णय कैसे लेते हैं — इन प्रमुख अंतरों और बारीकियों को समझना और ध्यान में रखना ज़रूरी है। आइए विस्तार से समझें कि B2B ईकॉमर्स B2C से कैसे अलग है।
B2B ईकॉमर्स बनाम B2C ईकॉमर्स
खरीद प्रक्रिया
एक B2B खरीदार सिर्फ अपने मन के मुताबिक कोई भी प्रोडक्ट यूं ही नहीं उठा सकता। खरीदार प्रोडक्ट और उसका वेरिएंट अपनी बिज़नेस ज़रूरतों के हिसाब से सावधानी से चुनता है। अच्छी क्वालिटी के साथ-साथ वाजिब कीमत सुनिश्चित करने वाला भरोसेमंद मैन्युफैक्चरर खोजना B2B खरीदार के लिए एक और काम है। इसके अलावा, दोनों पक्षों को लॉजिस्टिक्स पर भी विचार करना होता है, क्योंकि खरीदारों को तय करना होता है कि वे स्टॉक कब मंगाना चाहते हैं। हर बार इतना सब करना बहुत मेहनत का काम है।
मेहनत यहीं खत्म नहीं होती। B2B खरीदार ऐसे अनुभव की सराहना करते हैं, जहां कई कैटेगरी में बड़ी मात्राएं आसानी से जोड़ी जा सकें। ज़रूरत हो तो ऑर्डर की मात्राएं अलग-अलग शिपिंग तारीखों में बांटी जा सकें। चूंकि ज़्यादातर वही प्रोडक्ट और उनके वेरिएंट बार-बार चाहिए होते हैं, खरीदार ऑर्डर हिस्ट्री से पिछला ऑर्डर डुप्लिकेट कर पाने में सक्षम होना चाहिए। दोनों ही स्थितियों में, खरीदार आपके प्रोडक्ट में निवेश कर रहा है और आपके साथ कारोबार चुनकर अक्सर अपनी बैलेंस शीट पर बड़ा इन्वेंटरी जोखिम ले रहा है। निर्णय की इस प्रक्रिया में मदद के लिए ज़रूरी है कि ब्रांड B2B खरीदारों को विशिष्ट, प्रासंगिक कंटेंट दें।
खरीदार के लिए विशेष (एक्सक्लूसिव) एक्सेस
B2C और B2B ईकॉमर्स के बीच एक प्रमुख अंतर यह है कि मैन्युफैक्चरर या डिस्ट्रीब्यूटर के B2B पोर्टल पर खरीदार को डिफ़ॉल्ट रूप से कितनी पहुंच दी जाती है। आमतौर पर, इंटरनेट पर कोई भी अनाम खरीदार किसी B2C वेबसाइट पर जाकर प्रोडक्ट और कीमतें ब्राउज़ कर सकता है, जबकि B2B माहौल में सत्यापित पहचान और एक्सेस की शर्तें ज़रूरी होती हैं। दूसरे शब्दों में, ये “सिर्फ आमंत्रण पर” चलते हैं।
किसी B2B खरीदार को आपके स्टोर तक पहुंच देने के लिए ज़रूरी अनुमोदन (अप्रूवल) वर्कफ़्लो हमेशा आपके बिज़नेस के हिसाब से कुछ अलग होंगे, लेकिन इनमें क्रेडिट जांच, रिटेलर/डीलर के क्षेत्रीय टकराव से बचने के लिए टेरिटरी का आकलन, न्यूनतम ऑर्डर वॉल्यूम के करार या अन्य नियम-शर्तें जैसी अहम बातें शामिल हो सकती हैं। यह प्रक्रिया भले एक रुकावट जैसी लगे, लेकिन यह खरीदार के लिए एक्सक्लूसिविटी भी सुनिश्चित करती है। यह एक बार की मेहनत दोनों छोर पर रिश्ते को पक्का करती है और भविष्य के सभी लेन-देन की प्रक्रिया को सहज बनाती है। खरीदार की इस एक्सक्लूसिविटी से हर खरीदार का विशिष्ट डेटा मिलता है, जिसके ज़रिए विक्रेता पर्सनलाइज़्ड ऑफर, स्कीम, प्रमोशन टार्गेट कर सकता है और मार्केटिंग के दूसरे अवसर तलाश सकता है।
खरीदार-विशिष्ट कंटेंट
आपसे ऑनलाइन खरीदने वाले B2B खरीदारों को आमतौर पर अपने रिटेल स्टाफ या सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स को आपके प्रोडक्ट की खूबियों और हर SKU के रिटेल यूनिट इकोनॉमिक्स (कीमत, मार्जिन) के बारे में शिक्षित करना होता है, ताकि वे प्रोडक्ट को आगे प्रभावी ढंग से बेच सकें। भले ही आपके खरीदार आपके प्रोडक्ट को अपने मौजूदा बिज़नेस के इनपुट के तौर पर खरीद रहे हों, उन्हें आपके प्रोडक्ट के विशिष्ट मूल्य की अच्छी जानकारी और समझ होनी चाहिए।
एक सप्लायर के नाते ज़रूरी है कि आपके रिटेल ट्रेनिंग प्रोग्राम के साथ-साथ सेल-शीट, ट्रेनिंग वीडियो और मर्चेंडाइज़िंग दिशानिर्देशों जैसे प्रोडक्ट एजुकेशन संसाधनों की एक सेल्फ-सर्व लाइब्रेरी भी हो। इससे न सिर्फ गैर-ज़रूरी कस्टमर सर्विस कॉल कम होती हैं; बेहतर शिक्षित खरीदारों का सेल-थ्रू रेट बेहतर होता है और कस्टमर रिटेंशन की दर ऊंची होती है।
सहायता-प्राप्त खरीदारी (असिस्टेड बाइंग)
B2C खरीदारी के उलट, B2B खरीदार को खरीद के निर्णय लेने के लिए सेल्स रेप की सहायता चाहिए होती है, और यह ऑनलाइन B2B खरीदारी की पूरक होनी चाहिए — जिससे रिटेलर आपके प्रोडक्ट्स में पैसा लगाने में सहज महसूस करे। मानवीय सहायता का व्यक्तिगत स्पर्श भरोसा और रिश्ता बनाने में भी मदद करता है, जो खरीदार को सहज बनाता है। सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स से ऑर्डर लेने वाले नहीं, बल्कि सलाहकार और कंसल्टेंट की भूमिका की अपेक्षा है।
चूंकि सॉफ्टवेयर ऑर्डर लेने और प्रबंधन के सारे नियमित काम का समय बचाएगा, उनके पास होलसेल ग्राहकों को जोड़ने और परामर्श देने, रिश्ते बनाने — और अंततः उन्हें सफल बनाने — के लिए ज़्यादा समय होगा। और जानने के लिए यह ब्लॉग देखें: B2B ईकॉमर्स और फील्ड सेल्स साथ मिलकर कैसे काम कर सकते हैं
ग्राहक-विशिष्ट प्राइसिंग और प्रमोशन
B2B ईकॉमर्स पोर्टल में लॉगिन इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि ग्राहक-विशिष्ट प्राइसिंग — अक्सर हर प्रोडक्ट के स्तर पर — का महत्व बहुत है, जिसे संबंधित खरीदार के सामने सही ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। प्राइसिंग की शर्तें भी आमतौर पर हर अकाउंट के हिसाब से तय होती हैं। इसके बिना खरीदार का भरोसा टूट जाता है और वह मजबूरन ऑफलाइन चैनलों की ओर लौट जाता है — सुविधाजनक ऑनलाइन ऑर्डरिंग के विकल्प के बिना।
B2B में कस्टमर ग्रुप के हिसाब से लागू प्राइसिंग टियर इतने आम हैं कि खरीदार लगभग इनकी अपेक्षा ही रखते हैं। इसी तरह, प्रमोशन भी इस तरह कॉन्फ़िगर किए जाते हैं कि होलसेल ग्राहकों या रिटेलर्स को उनकी बिज़नेस क्षमता के अनुरूप लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिले।
कुछ और अहम अंतर हैं, जो ज़्यादातर B2B खरीद के मामले में ही देखने को मिलते हैं:
- न्यूनतम मात्रा और केस पैक
- कंपनी या इंडस्ट्री-विशिष्ट जटिल प्रोडक्ट वेरिएंट संरचनाएं
- MSRP और MAP की जानकारी
- ट्रेड प्रमोशन और स्कीम
- ग्राहक-विशिष्ट पेमेंट विधि की पात्रता, और भी बहुत कुछ
B2B खरीदार को B2C खरीदार से बेहतर शॉपिंग अनुभव चाहिए। B2B लेन-देन में दांव बहुत ऊंचे होते हैं, क्योंकि बड़े निवेश जुड़े होते हैं; जबकि B2C खरीदार किसी प्रोडक्ट की खरीदारी सहज भाव से कर सकता है और छोटी रकम का ही जोखिम उठाता है। Edistera में, वर्षों के अनुभव के साथ, हम मैन्युफैक्चरर्स—डिस्ट्रीब्यूटर्स—रिटेलर्स के बीच की खाई पाटने में जुटे हैं। टेक्नोलॉजी सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बना सकती है, जिससे किसी टकराव की गुंजाइश नहीं बचती। अगर Edistera B2B ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म में आपकी दिलचस्पी है, तो कृपया डेमो के लिए बेझिझक हमसे संपर्क करें।