Investopedia के अनुसार B2B कॉमर्स की परिभाषा है, “एक प्रकार का वाणिज्यिक लेन-देन जो बिज़नेस के बीच होता है, जैसे निर्माता और होलसेलर के बीच, या होलसेलर और रिटेलर के बीच।” आइए B2B ई-कॉमर्स की परिभाषा देखें:
B2B ई-कॉमर्स का मतलब है बिज़नेस टू बिज़नेस इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स, यानी बिज़नेस के बीच होने वाले ऑनलाइन लेन-देन, जिनमें अक्सर ब्रांड और डिस्ट्रीब्यूटर व्यक्तिगत ग्राहकों के बजाय होलसेल ग्राहकों या रिटेलरों को प्रोडक्ट बेचते हैं।
होलसेल स्तर पर होने वाले लेन-देन आमतौर पर बिज़नेस-टू-बिज़नेस होते हैं, जबकि रिटेल स्तर के लेन-देन अधिकतर बिज़नेस-टू-कंज़्यूमर (B2C) होते हैं। B2B कॉमर्स, B2C कॉमर्स से काफी अलग है। यह एक स्तरीय (लेयर्ड) व्यवस्था में काम करता है, जहाँ एक बिज़नेस कई अन्य बिज़नेस के साथ लेन-देन करता है। यह सिर्फ प्रोडक्ट बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे कहीं आगे है। प्रोडक्ट बेचना तो बहुत छोटा हिस्सा है, क्योंकि अधिकांश बिक्री मौजूदा ग्राहकों के साथ ही होती है।
B2B ई-कॉमर्स की सटीक परिभाषा तक पहुँचना
B2B ई-कॉमर्स को ठीक से समझने के लिए इस अवधारणा को इसके दो हिस्सों में बाँटना उपयोगी है: B2B यानी बिज़नेस-टू-बिज़नेस वाला हिस्सा, और ई-कॉमर्स यानी ऑनलाइन लेन-देन वाला हिस्सा। इस नज़रिए से देखें तो B2B ई-कॉमर्स की परिभाषा काफी व्यापक हो सकती है।
जटिल B2B रिश्तों के इकोसिस्टम का बेहतरीन उदाहरण ऑटोमोटिव उद्योग है। ऑटोमोटिव में एक विशाल सप्लाई चेन है, जिसमें वे कंपनियाँ शामिल हैं जो शुरुआती कच्चा माल (धातु, काँच, रबर आदि) उपलब्ध कराने से लेकर सिर्फ कार ही नहीं, बल्कि कार के सभी पुर्ज़ों — रेडियो से लेकर हेडलैम्प, कंप्यूटर सिस्टम और बहुत कुछ — के निर्माण तक का काम करती हैं।
एक अकेली कार बनाने के लिए, जो बाद में अंतिम उपभोक्ता को बेची जाएगी, सप्लाई चेन में सैकड़ों बिज़नेस और B2B ग्राहक रिश्ते शामिल हो सकते हैं। ई-कॉमर्स वाला हिस्सा यह बताता है कि ये तमाम तरह के बिज़नेस आपस में लेन-देन करने और रिश्ते सँभालने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।
B2C बनाम B2B ई-कॉमर्स
B2B ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म, B2C प्लेटफ़ॉर्म से काफी अलग होता है। B2B ई-कॉमर्स को B2C से अलग बनाने वाले कुछ कारण ये हैं:
- शामिल लोगों की संख्या: जब कोई बिज़नेस खरीदारी करता है, तो सही विक्रेता, सही प्रोडक्ट, सही कीमत आदि तय करने में बहुत से लोग शामिल होते हैं। जबकि जब कोई व्यक्ति खरीदता है, जैसा कि B2C में होता है, तो सिर्फ एक व्यक्ति शामिल होता है और बहुत ज़्यादा पहलुओं पर विचार नहीं किया जाता। साथ ही, B2C खरीदारी काफी तुरंत होती है, जबकि B2B खरीदारी एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें निर्णय से पहले कई पहलुओं पर विचार किया जाता है।
- भुगतान: B2B भुगतान काफी धीमे होते हैं, क्योंकि ये बड़ी मात्रा (बल्क) में होते हैं। आमतौर पर सेवाएँ या माल डिलीवर होने के कुछ दिनों बाद (अक्सर 30 दिन) भुगतान किया जाता है। दूसरी ओर, B2C में खरीदार प्रोडक्ट मिलने से पहले भुगतान करता है।
- मूल्य निर्धारण: B2C कीमतें आमतौर पर तय होती हैं। B2B प्राइसिंग मात्रा या अन्य कारकों के अनुसार मोल-भाव योग्य होती है। कीमतें ग्राहकों के साथ रिश्ते के आधार पर बेहद व्यक्तिगत (पर्सनलाइज़्ड) होती हैं।
- प्रोडक्ट विकल्प: B2C में खरीदार आमतौर पर कुछ ही विकल्पों में से एक प्रोडक्ट चुन लेता है। लेकिन B2B खरीदार हर एक जानकारी को बारीकी से देखते हैं; उन्हें एक विशाल कैटलॉग चाहिए जिसमें हर प्रोडक्ट के कई वेरिएशन शामिल हों। कभी-कभी वे कस्टमाइज़ेशन का अनुरोध भी कर सकते हैं।
इनके अलावा भी कई कारक हैं जो B2B कॉमर्स को B2C से कहीं अधिक जटिल बनाते हैं। दोनों तरीके अच्छे हैं, और दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं। अगर आप एक छोटा बिज़नेस हैं, तो Amazon जैसे ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस पर रजिस्टर करना अच्छा विचार है। इससे अपनी पूरी वेबसाइट सँभालने में लगने वाले संसाधन बचते हैं। दूसरी ओर, अपने होलसेल ग्राहकों के लिए खुद का B2B ऑर्डरिंग पोर्टल रखने से यह सुनिश्चित होता है कि आपके ऑनलाइन पोर्टल पर आने वाला हर व्यक्ति वही खरीदेगा जो आप बेचना चाहते हैं, और ग्राहक आपके अपने रहते हैं, जिनके साथ आप लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते बना सकते हैं।
B2B ई-कॉमर्स के 3 बुनियादी मॉडल
- सप्लायर ओरिएंटेड (ई-डिस्ट्रीब्यूशन): Cisco इस मॉडल का एक सफल उदाहरण है। उनके ऑनलाइन मार्केटप्लेस का नाम Cisco Connection Online है। उन्होंने 1991 में ऑनलाइन बिज़नेस शुरू किया, 1994 में अपनी वेबसाइट लॉन्च की, और 1998 तक तकनीकी सहायता, ऑर्डर स्टेटस और सॉफ़्टवेयर डाउनलोड के लिए वेबसाइट महीने में 10 लाख बार एक्सेस की जाने लगी। एप्लिकेशन ऑनलाइन लॉन्च करने से उन्हें हर साल 36.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बचत हुई। इसके अलावा, डुप्लिकेशन, पैकेजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में हर साल 18 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बचत; साथ ही हर साल 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की बचत इसलिए हुई क्योंकि कैटलॉग की छपाई और वितरण की अब ज़रूरत नहीं रही।
- बायर ओरिएंटेड (ई-प्रोक्योरमेंट): GE की बिडिंग साइट इस मॉडल का सफल उदाहरण है। इसे GE TPN Post के नाम से जाना जाता है। यहाँ खरीदार अपने प्रोजेक्ट की जानकारी पोस्ट करने के लिए मामूली शुल्क देते हैं। संभावित सप्लायर उस पर बोली लगाते हैं और खरीदार सबसे अच्छी बोली चुनते हैं।
- इंटरमीडियरी ओरिएंटेड (ई-एक्सचेंज): यहाँ सबसे अच्छा उदाहरण Alibaba है। 1999 में शुरू हुई Alibaba ने चीनी निर्माताओं को विदेशी खरीदारों से जोड़ा। 2015 से Alibaba का मुनाफ़ा और बिक्री Amazon, eBay और Walmart समेत सभी अमेरिकी रिटेलरों के कुल योग से भी आगे निकल गई है!
B2B ई-कॉमर्स आपके बिज़नेस में कैसे फिट होता है?
Forrester के अनुसार, 52% B2B खरीदार अपने मोबाइल डिवाइस पर प्रोडक्ट के बारे में रिसर्च करते हैं और फिर आगे की खरीदारी तथा उससे जुड़े अन्य कदम उठाते हैं। मोबाइल फ़ोन ने इस प्रक्रिया को कहीं ज़्यादा आसान, तेज़ और सुविधाजनक बना दिया है। खरीदार ओमनी-चैनल जुड़ाव और सेल्स रणनीति की भी अपेक्षा रखते हैं। वे किसी भी B2C ई-कॉमर्स के बराबर अनुभव चाहते हैं — आकर्षक डिज़ाइन से लेकर प्रोडक्ट आसानी से स्क्रॉल करने और बेहतरीन कस्टमर सर्विस तक, और भी बहुत कुछ।
50% B2B खरीदारों ने कहा कि वे ऐसे विक्रेता को प्राथमिकता देंगे जो अधिक कस्टमाइज़्ड और पर्सनलाइज़्ड सेवा दे सके। इसके अलावा, 40% खरीदारों ने कहा कि अकाउंटिंग, फाइनेंस, OMS (Order Management Systems), ERP (Enterprise Resource Planning) के साथ बेहतर बैक-एंड इंटीग्रेशन को प्राथमिकता दी जाएगी। संक्षेप में, खरीदार ज़्यादा आराम, आसानी और सुविधा चाहते हैं।
मानें या न मानें, B2B कॉमर्स इतनी रफ़्तार से बढ़ रहा है कि यह जल्द ही B2C बाज़ार को बौना साबित कर देगा। B2B ई-कॉमर्स सॉल्यूशन तुलनात्मक रूप से जटिल हैं, लेकिन ऑफ़लाइन की तुलना में ढेरों फायदे देते हैं। इसलिए, अगर आप B2B होलसेल में हैं, तो अपने होलसेल डिस्ट्रीब्यूशन को जल्द से जल्द ऑनलाइन लाइए। प्रतिस्पर्धियों से आगे रहने का हमेशा फायदा होता है। जितनी जल्दी आप अपनी मौजूदगी दर्ज कराएँगे, उतनी ही जल्दी आप ऑनलाइन अपनी प्रतिष्ठा बना पाएँगे।